
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल टूटी? पत्नी गीतांजलि ने उठाए सवाल
नमस्कार दोस्तों,
लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा में हैं। जंतर-मंतर पर कई दिनों तक चले उनके अनशन के बाद उन्हें स्वास्थ्य बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया। अब उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अदालत ने केवल स्वास्थ्य की निगरानी करने का निर्देश दिया था, न कि उन्हें जबरन अस्पताल में भर्ती करने का।
सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों और लद्दाख की कुछ मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे। अनशन के दौरान उनकी तबीयत लगातार खराब होती गई। डॉक्टरों ने बताया कि उनका वजन काफी कम हो गया था और ब्लड प्रेशर व ब्लड शुगर का स्तर भी सामान्य से नीचे पहुंच गया था।
स्वास्थ्य को देखते हुए पुलिस और मेडिकल टीम उन्हें अस्पताल लेकर गई। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम डॉक्टरों की सलाह और अदालत के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया।
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने कहा कि अदालत ने केवल स्वास्थ्य की निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। उनके अनुसार, यह सवाल उठता है कि क्या अस्पताल में भर्ती करने का निर्णय उनकी सहमति के बिना लिया गया। उन्होंने पूरे मामले में स्पष्टता की मांग की है।
प्रशासन और पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई केवल स्वास्थ्य कारणों से की गई। अधिकारियों के अनुसार, जब डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर बताया, तब उन्हें बेहतर इलाज और निगरानी के लिए अस्पताल ले जाया गया। प्रशासन ने इसे किसी प्रकार की गिरफ्तारी या दंडात्मक कार्रवाई से जोड़ने से इनकार किया है।
इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग मरीज की सहमति और अदालत के आदेश की व्याख्या को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल इस मामले में अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने दावे हैं और आगे की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।
• सोनम वांगचुक लंबे समय से जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे।
• स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
• पत्नी गीतांजलि आंगमो ने अस्पताल में भर्ती किए जाने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
• प्रशासन का कहना है कि यह फैसला डॉक्टरों की सलाह और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया गया।
• मामले को लेकर सार्वजनिक और सोशल मीडिया पर चर्चा जारी है।
जवाब: अधिकारियों के अनुसार, अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने और डॉक्टरों की सलाह के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
जवाब: गीतांजलि आंगमो का कहना है कि अदालत ने केवल स्वास्थ्य की निगरानी का निर्देश दिया था और अस्पताल में भर्ती करने की प्रक्रिया पर स्पष्टता होनी चाहिए।
जवाब: हां। प्रशासन का कहना है कि यह कदम पूरी तरह स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उठाया गया और इसका उद्देश्य उचित चिकित्सा उपलब्ध कराना था।
जवाब: जी हां। मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और इस पर सार्वजनिक चर्चा जारी है।
जवाब: नहीं। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही घटनाक्रम सामने आया है और आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है।
⚠︎Disclaimer :
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले से जुड़ी आधिकारिक जानकारी या न्यायिक प्रक्रिया में भविष्य में कोई नया अपडेट आने पर तथ्य बदल सकते हैं। लेख का उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है।


