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HEALTH (स्वास्थ्य) | 2026-07-29
मंकी फ्रूट (Monkey Fruit / दा हू): जंगली खट्टा-मीठा फल – पाचन और पारंपरिक सेहत का साथी

मंकी फ्रूट (Monkey Fruit / दा हू): जंगली खट्टा-मीठा फल – पाचन और पारंपरिक सेहत का साथी

द इंडियन न्यूजपेपर ब्यूरो:

नमस्ते दोस्तों, कैसे हो आप सब? आज मैं आपको एक ऐसे जंगली फल के बारे में बताने वाला हूँ जो जैकफ्रूट जैसा दिखता है लेकिन आकार में छोटा होता है और खाने में खट्टा-मीठा स्वाद देता है। हम बात कर रहे हैं मंकी फ्रूट (Monkey Fruit) की। यह छोटा-सा फल देखने में जैकफ्रूट जैसा लगता है लेकिन आकार में छोटा होता है। मंकी फ्रूट जंगली क्षेत्रों में उगता है और खाने में खट्टा-मीठा होता है। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

मंकी फ्रूट क्या है?

मंकी फ्रूट Artocarpus lakoocha (या Artocarpus lacucha) नाम के पेड़ का फल है। इसे दा हू, मंकी जैक या लाखूचा भी कहते हैं। आकार में छोटा-मध्यम, छिलका खुरदुरा और गूदा खट्टा-मीठा होता है।

मंकी फ्रूट का इतिहास

मंकी फ्रूट का मूल स्थान दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत माना जाता है। यह जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है। भारत में पूर्वोत्तर राज्यों, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार और कुछ दक्षिणी इलाकों में पाया जाता है। स्थानीय लोग इसे पारंपरिक रूप से खाते और दवा के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

Scientific Information

Scientific Name: Artocarpus lakoocha / Artocarpus lacucha

Family: Moraceae

Genus: Artocarpus

Native Region: South & Southeast Asia

Common Names: Monkey Fruit, Monkey Jack, Dahu, Lakoocha

मंकी फ्रूट में पोषक तत्व (Per 100g – अनुमानित)
NutrientAmount (Per 100g)
Calories50-60 kcal
WaterGood amount
CarbohydratesModerate
Natural SugarsModerate
Dietary Fiber2-3 g
ProteinPresent
Total FatLow
Saturated FatTrace
Monounsaturated FatTrace
Polyunsaturated FatTrace
Omega-3Trace
Omega-6Trace
Vitamin CGood amount
Vitamin APresent
Vitamin B ComplexPresent
PotassiumPresent
CalciumPresent
MagnesiumPresent
IronPresent
SodiumLow
CarotenoidsPresent
PolyphenolsPresent
FlavonoidsPresent
Other Bioactive CompoundsAntioxidants, Tannins
मंकी फ्रूट के संभावित स्वास्थ्य लाभ
1. पाचन सुधार

फाइबर कब्ज दूर करने और पेट साफ रखने में मदद करता है।

2. इम्यूनिटी

विटामिन C से शरीर की रक्षा शक्ति बढ़ती है।

3. एंटीऑक्सीडेंट

सूजन कम करने और फ्री रेडिकल्स से लड़ने में सहायक होता है।

4. वजन नियंत्रण

कम कैलोरी होने से वजन प्रबंधन में मदद कर सकता है।

5. त्वचा के लिए

विटामिन C त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।

Research Snapshot ⭐

मंकी फ्रूट (Artocarpus lakoocha) के traditional use और कुछ phytochemical studies पर digestion और antioxidant properties के संकेत मिलते हैं। वैज्ञानिक डेटा सीमित है, इसलिए सामान्य पोषण लाभ ही मुख्य हैं।

इस फल का इस्तेमाल कैसे करें?

ताजा (पका हुआ) खाकर

अचार या चटनी बनाने में

पकाकर सब्जी या अन्य व्यंजन में

कैसे चुनें और स्टोर करें?

पका हुआ, नरम फल चुनें।

जल्दी खराब होता है, तुरंत इस्तेमाल करें।

इसकी तुलना किन फलों से की जा सकती है?

फल | खास विशेषता

Monkey Fruit | Wild, sour-sweet

Jackfruit | Larger, sweeter

Fig | Similar texture in some stages

मुख्य बातें (Highlights)

जंगली फल, खट्टा-मीठा स्वाद।

फाइबर और विटामिन C से भरपूर।

अचार, चटनी या ताजा खा सकते हो।

पूर्वोत्तर भारत में ज्यादा मिलता है।

पारंपरिक चिकित्सा में भी इस्तेमाल होता है।

सावधानियां

ज्यादा मत खाओ – खट्टा होने से पेट में जलन हो सकती है।

अच्छी तरह धोकर और पकाकर खाएं।

एलर्जी वाले लोग सावधानी बरतें।

अपरिपक्व फल न खाएं।

रोचक तथ्य (Interesting Facts)

मंकी फ्रूट को “दाहू” या “मंकी जैक” भी कहते हैं।

इसका पेड़ जैकफ्रूट से मिलता-जुलता होता है।

जंगली जानवर भी इसे पसंद करते हैं, इसलिए नाम पड़ा।

भारत में यह अभी कम प्रचलित है।

स्थानीय बाजारों में मौसमी रूप से मिलता है।

जरूरी सवाल-जवाब (FAQs)
सवाल 1: रोज कितना मंकी फ्रूट खा सकते हैं?

जवाब: 4-6 छोटे फल काफी हैं।

सवाल 2: क्या मंकी फ्रूट वजन घटाने में मदद करता है?

जवाब: कम कैलोरी और फाइबर होने से हां, लेकिन संतुलित डाइट के साथ।

सवाल 3: मंकी फ्रूट कहां मिलता है?

जवाब: पूर्वोत्तर भारत और कुछ जंगली इलाकों के बाजारों में।

सवाल 4: गर्भवती महिलाएं खा सकती हैं?

जवाब: हां, लेकिन डॉक्टर की सलाह से।

⚠︎ Disclaimer

यह जानकारी सामान्य ज्ञान के लिए है। कोई स्वास्थ्य समस्या हो तो डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। यह आर्टिकल किसी इलाज का विकल्प नहीं है। हर इंसान का शरीर अलग होता है। मंकी फ्रूट पर विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन सीमित हैं, इसलिए सावधानी बरतें।

WRITTEN AND PUBLISHED BY SANDEEP SINGH, FOUNDER & EDITOR