
उमर खालिद के पिता Syed Qasim Rasool Ilyas का SIMI से क्या संबंध था ?
नमस्ते दोस्तों,
उमर खालिद पिछले कई वर्षों से देश की छात्र राजनीति और कानूनी मामलों में चर्चा का विषय रहे हैं। 2016 के JNU विवाद से लेकर 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले तक उनका नाम कई बार सुर्खियों में आया। इसी दौरान उनके पिता सैयद कासिम रसूल इलियास के पुराने SIMI संबंधों को लेकर भी समय-समय पर चर्चा होती रही है।
इस लेख में हम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड और न्यायिक दस्तावेजों के आधार पर सरल भाषा में पूरी जानकारी समझेंगे।
उमर खालिद का पूरा नाम सैयद उमर खालिद है। उनका जन्म 11 अगस्त 1987 को नई दिल्ली में हुआ था।
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल कॉलेज से इतिहास में स्नातक किया। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से इतिहास में एमए, एमफिल और पीएचडी के लिए शोध कार्य किया।
छात्र जीवन के दौरान वे Democratic Students' Union (DSU) से जुड़े रहे और बाद में विभिन्न सामाजिक अभियानों में भी सक्रिय रहे।
फरवरी 2016 में JNU परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद विवाद खड़ा हुआ। कार्यक्रम के दौरान भारत विरोधी नारे लगाए जाने के आरोप लगे।
दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद सहित कुछ छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
उमर खालिद ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि उन्होंने ऐसे नारे नहीं लगाए तथा उन्हें गलत तरीके से इस मामले में शामिल किया गया था।
सितंबर 2020 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उमर खालिद को उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में गिरफ्तार किया।
दिल्ली पुलिस का आरोप है कि वे कथित बड़ी साजिश का हिस्सा थे। उनके खिलाफ UAPA सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
दूसरी ओर, उमर खालिद ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने केवल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया था और उनके खिलाफ मामला राजनीतिक कारणों से बनाया गया है।
यह मामला अभी अदालत में लंबित है और अंतिम फैसला आना बाकी है।
उमर खालिद के पिता का नाम सैयद कासिम रसूल इलियास है।
वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं तथा बाद के वर्षों में Welfare Party of India से भी जुड़े।
SIMI (Students Islamic Movement of India) की स्थापना वर्ष 1977 में एक छात्र संगठन के रूप में हुई थी।
बाद के वर्षों में भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने संगठन पर कट्टरपंथी विचारधारा अपनाने तथा गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप लगाए।
इन्हीं आधारों पर केंद्र सरकार ने वर्ष 2001 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत SIMI पर प्रतिबंध लगा दिया।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, सैयद कासिम रसूल इलियास SIMI के शुरुआती नेताओं और पदाधिकारियों में शामिल रहे थे।
हालांकि, उनका कहना है कि उन्होंने 1985 में ही संगठन छोड़ दिया था। उनके अनुसार, उस समय वे संगठन की बदलती दिशा से सहमत नहीं थे।
यह भी उल्लेखनीय है कि SIMI पर प्रतिबंध 2001 में लगाया गया, यानी उनके दावे के अनुसार वे प्रतिबंध लगने से काफी पहले संगठन से अलग हो चुके थे।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, केवल SIMI के शुरुआती सदस्य या पदाधिकारी होने के आधार पर सैयद कासिम रसूल इलियास को किसी गंभीर आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने का स्थापित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में ऐसा कोई स्थापित प्रमाण उपलब्ध नहीं है जिससे यह साबित हो कि उमर खालिद SIMI के सदस्य रहे हों।
• उमर खालिद पूर्व JNU छात्र नेता हैं।
• 2016 के JNU विवाद के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए।
• 2020 के दिल्ली दंगा मामले में वे आरोपी हैं और मामला अभी अदालत में लंबित है।
• उनके पिता सैयद कासिम रसूल इलियास SIMI के शुरुआती नेताओं में रहे थे।
• उनका कहना है कि उन्होंने 1985 में ही SIMI छोड़ दिया था।
• भारत सरकार ने SIMI पर वर्ष 2001 में UAPA के तहत प्रतिबंध लगाया था।
जवाब: वे पूर्व JNU छात्र नेता और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता हैं।
जवाब: वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में UAPA सहित अन्य धाराओं के तहत।
जवाब: नहीं। मामला अभी अदालत में लंबित है और अंतिम फैसला आना बाकी है।
जवाब: सैयद कासिम रसूल इलियास, जो SIMI के शुरुआती दौर से जुड़े रहे थे और उनका कहना है कि उन्होंने 1985 में संगठन छोड़ दिया था।
जवाब: सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में ऐसा कोई स्थापित प्रमाण नहीं है।
⚠︎ Disclaimer:
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड, सरकारी दस्तावेजों और विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोप तब तक सिद्ध नहीं माने जाते, जब तक सक्षम न्यायालय अंतिम निर्णय न दे दे।


