
केदारनाथ में 15.45 लाख श्रद्धालुओं से 250 टन कचरा: पिछले साल से 10.7 गुना ज्यादा; 4,732 यात्रियों ने 12 टन कूड़ा वापस पहुंचाया
नमस्कार दोस्तों,
उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में इस साल श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के साथ कचरा प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ी है। केदारनाथ नगर पंचायत और सुलभ इंटरनेशनल के अनुसार, 156 दिनों की यात्रा अवधि में करीब 15.45 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने के दौरान 250 टन कचरा जमा हुआ। यह 2025 की पूरी यात्रा अवधि में दर्ज 21.40 टन कचरे से 10.7 गुना से ज्यादा है।
गौरीकुंड से केदारनाथ तक करीब 16 किलोमीटर के पैदल मार्ग पर सफाई अभियान चलाया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, रास्ते में प्लास्टिक की पन्नियां, बोतलें, रैपर और खाने-पीने की पैकेजिंग जैसी सामग्री जमा हुई है। कचरा हटाने के लिए 450 से ज्यादा कर्मचारी लगाए गए हैं।
नगर पंचायत के मुताबिक, केदारनाथ मार्ग पर 600 से ज्यादा डस्टबिन लगाए गए हैं। यात्रियों के लिए 31 सुलभ शौचालय और 71 स्टील-फ्रेम शौचालय भी संचालित किए जा रहे हैं।
केदारनाथ नगर पंचायत के अधिकारी नीरज कुकरेती के अनुसार, मशीनों की मदद से करीब 24 टन सूखे कचरे की सिल्लियां तैयार की गई हैं। इन्हें धाम से नीचे लाकर आगे के निस्तारण की प्रक्रिया में भेजा जा रहा है। बाकी कचरे को भी डिकंपोज और प्रोसेस करने की तैयारी की जा रही है।
नगर पंचायत के अनुसार, कचरे के निस्तारण से होने वाली आय को भविष्य में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर करने में इस्तेमाल करने की योजना है।
कचरा प्रबंधन के लिए ‘कैरी मी बैक’ अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके तहत श्रद्धालुओं को विशेष बैग दिए जाते हैं, जिनमें वे करीब 4 से 5 किलो सूखा कचरा इकट्ठा करके केदारनाथ से गौरीकुंड तक अपने साथ वापस लाते हैं।
22 सितंबर तक 4,732 श्रद्धालु इस अभियान में शामिल होकर करीब 12 टन सूखा कूड़ा केदारनाथ से गौरीकुंड पहुंचा चुके थे। इसमें प्लास्टिक बोतलें, रैपर और पैकेजिंग सामग्री शामिल है।
आंकड़ों के अनुसार, 2025 में करीब 19.62 लाख श्रद्धालुओं ने केदारनाथ धाम के दर्शन किए थे। इस साल भी सितंबर तक श्रद्धालुओं की संख्या 15 लाख से ऊपर पहुंच चुकी है।
हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में कचरे के आंकड़े अलग अवधि और अलग स्रोतों के आधार पर दिए गए हैं। उदाहरण के लिए, RTI के जवाब में अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान 50.30 मीट्रिक टन कचरे का आंकड़ा सामने आया है, जबकि यात्रा के व्यापक 156-दिन के आंकड़े में करीब 250 टन कचरा बताया गया है। दोनों आंकड़ों को एक ही अवधि का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
केदारनाथ हिमालय के संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के साथ प्लास्टिक और दूसरे ठोस कचरे का प्रबंधन प्रशासन के लिए चुनौती बन रहा है। नगर पंचायत के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान करीब 20 टन प्लास्टिक कचरा भी दर्ज हुआ, जिसमें से 18.5 टन यानी 92.5% का प्रसंस्करण किया जा चुका था।
केदारनाथ में 156 दिनों में करीब 15.45 लाख श्रद्धालु पहुंचे।
इस दौरान करीब 250 टन कचरा जमा होने की जानकारी है।
यह 2025 की पूरी यात्रा अवधि के 21.40 टन कचरे से 10.7 गुना से ज्यादा है।
सफाई अभियान में 450 से ज्यादा कर्मचारी लगाए गए हैं।
केदारनाथ मार्ग पर 600 से ज्यादा डस्टबिन लगाए गए हैं।
मशीनों से करीब 24 टन सूखे कचरे की सिल्लियां बनाई गई हैं।
‘कैरी मी बैक’ अभियान में 4,732 श्रद्धालु शामिल हुए।
श्रद्धालुओं ने करीब 12 टन सूखा कचरा वापस गौरीकुंड पहुंचाया।
अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान करीब 20 टन प्लास्टिक कचरा दर्ज हुआ।
अलग-अलग अवधि के कारण 50.30 टन और 250 टन के आंकड़ों को अलग संदर्भ में समझना जरूरी है।
केदारनाथ नगर पंचायत और सुलभ इंटरनेशनल के अनुसार, 156 दिनों में करीब 250 टन कचरा जमा हुआ।
2025 की पूरी यात्रा अवधि में 21.40 टन कचरा दर्ज हुआ था। इस साल के 250 टन के आंकड़े के मुकाबले यह करीब 10.7 गुना है।
‘कैरी मी बैक’ अभियान के तहत 4,732 श्रद्धालु करीब 12 टन सूखा कचरा केदारनाथ से गौरीकुंड तक वापस ला चुके थे।
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर कचरा हटाने के लिए 450 से ज्यादा कर्मचारी लगाए गए हैं।
50.30 टन का आंकड़ा अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान RTI के जरिए सामने आए कचरे का है, जबकि 250 टन का आंकड़ा 156 दिनों की व्यापक यात्रा अवधि से संबंधित है। इसलिए दोनों आंकड़े अलग-अलग अवधि और संदर्भ के हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में कचरे की मात्रा और श्रद्धालुओं की संख्या से जुड़े आंकड़े केदारनाथ नगर पंचायत, सुलभ इंटरनेशनल और RTI से सामने आई जानकारी पर आधारित हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में अवधि और गणना पद्धति अलग होने के कारण आंकड़ों में अंतर हो सकता है।


