
‘SIR के सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए’, विवादों के बीच चुनाव आयोग का आधिकारिक बयान
नमस्कार दोस्तों,
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने एक बार फिर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा है कि SIR समेत उसके सभी निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के मुताबिक, तीनों आयुक्तों के बीच चर्चा के दौरान अलग-अलग सुझाव या टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
चुनाव आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों और संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत काम करने वाला बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय है। आयोग के अनुसार, किसी फैसले के मसौदे पर आयुक्तों या अधिकारियों की ओर से सुझाव, तकनीकी टिप्पणियां और आपत्तियां दर्ज होना आंतरिक जांच-पड़ताल और विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया है।
आयोग ने यह भी कहा कि केवल किसी आंतरिक टिप्पणी या सुझाव को अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उसके मुताबिक, अंतिम आदेश और निर्णय आयोग की सामूहिक मंजूरी के बाद ही जारी किए जाते हैं।
ECI ने स्पष्ट किया कि देशभर में SIR से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए। आयोग ने यह भी कहा कि हाल के महीनों में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े कई फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
आयोग की यह सफाई उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले महीनों में कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात कही गई थी।
चुनाव आयोग के अनुसार, किसी मुद्दे पर अलग-अलग राय या सुझाव सामने आना संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा है। आयोग ने कहा कि इन टिप्पणियों को अंतिम निर्णय से अलग करके देखा जाना चाहिए।
कानून के तहत आयोग के कामकाज में जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से निर्णय लेने का प्रावधान है और यदि मतभेद बना रहे तो बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है। वर्तमान में आयोग में CEC समेत तीन सदस्य हैं।
चुनाव आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म और मतदाता डेटा से जुड़े सिस्टम को लेकर भी कहा कि ये सुरक्षा प्रोटोकॉल और ऑडिट व्यवस्था के तहत संचालित होते हैं। आयोग के मुताबिक, IT सुरक्षा जांच और ऑडिट नियंत्रण डेटा की सुरक्षा के लिए नियमित प्रक्रियाओं का हिस्सा हैं।
चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों पर आधिकारिक सफाई दी।
ECI के मुताबिक SIR के फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए।
आयोग ने कहा कि आंतरिक सुझाव और टिप्पणियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
किसी मसौदे पर दर्ज आपत्ति को अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।
आयोग ने अपने डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा और ऑडिट व्यवस्था पर भी स्थिति स्पष्ट की।
यह बयान उन रिपोर्टों के बीच आया है जिनमें दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की बात कही गई थी।
ECI ने कहा कि SIR से जुड़े सभी अंतिम निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं।
हां। आयोग ने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग सुझाव, टिप्पणियां और तकनीकी आपत्तियां सामने आना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया है।
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले महीनों में कुछ चुनावी प्रक्रियाओं और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने कहा है कि ऐसी टिप्पणियों को अंतिम निर्णय या आयोग के भीतर असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
SIR यानी Special Intensive Revision, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची की समीक्षा और आवश्यक सुधार किए जाते हैं।
यह खबर चुनाव आयोग के आधिकारिक बयान और उपलब्ध विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। आयोग के बयान और मीडिया रिपोर्टों में दर्ज दावों को अलग-अलग संदर्भों में प्रस्तुत किया गया है। SIR से जुड़ी कानूनी या प्रशासनिक प्रक्रिया में आगे होने वाले बदलावों के अनुसार जानकारी अपडेट हो सकती है।


