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GENERAL / LATEST NEWS | 2026-09-27
‘बद्रीनाथ को नाचघर मत बनाइए, यहां शंख भी बैन है’: DJ कॉन्सर्ट पर मुरली मनोहर जोशी ने जताई आपत्ति; DM ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

‘बद्रीनाथ को नाचघर मत बनाइए, यहां शंख भी बैन है’: DJ कॉन्सर्ट पर मुरली मनोहर जोशी ने जताई आपत्ति; DM ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

नमस्कार दोस्तों,

उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में DJ और तेज संगीत के वीडियो सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया है। कार्यक्रम 19 और 20 सितंबर को ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल 2026’ के तहत आयोजित हुआ था। इसके बाद धार्मिक परंपराओं और कार्यक्रम के स्वरूप को लेकर सवाल उठे।

द इंडियन न्यूजपेपर ब्यूरो:

कार्यक्रम का आयोजन बदरीनाथ के टूरिस्ट/अराइवल प्लाजा क्षेत्र में किया गया था। इसका विषय ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ था और इसमें लोक संगीत, नृत्य तथा अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। आयोजन भारतीय सेना और चमोली जिला प्रशासन के सहयोग से हुआ था।

कार्यक्रम के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, जिनमें तेज संगीत के बीच कलाकारों की प्रस्तुति और दर्शकों के डांस करने के दृश्य दिखाई दिए। इसके बाद बदरीनाथ की धार्मिक मर्यादाओं को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर बहस शुरू हुई।

मुरली मनोहर जोशी ने जताई आपत्ति

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कार्यक्रम पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम में DJ या संगीत समारोह की अनुमति देना उनकी नजर में सांस्कृतिक मर्यादाओं और धाम की पवित्रता से जुड़ा गंभीर विषय है।

जोशी ने बदरीनाथ में शंख बजाने की धार्मिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां शंख बजाना भी वर्जित माना जाता है, वहां तेज संगीत और DJ कार्यक्रम आयोजित करना उचित नहीं है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने की मांग की।

DM ने जारी किया नोटिस

विवाद के बीच चमोली के जिलाधिकारी ने कार्यक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल शांतनु को नोटिस जारी कर कार्यक्रम की अनुमति और आयोजन से जुड़े बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

प्रशासन यह स्पष्ट करना चाहता है कि कार्यक्रम के लिए किस स्तर से अनुमति ली गई थी और आयोजन के दौरान निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन हुआ या नहीं। मामले में प्रशासनिक स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है।

धार्मिक संगठनों ने भी उठाए सवाल

उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत और संतों की ओर से भी कार्यक्रम के स्वरूप पर आपत्ति जताई गई है। महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने कहा कि आपत्ति सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने से नहीं, बल्कि उसके स्वरूप और तेज ध्वनि से है।

ज्योतिर्मठ से जुड़े संतों ने भी बदरीनाथ क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं और शांत वातावरण का हवाला देते हुए भविष्य में ऐसे आयोजनों के स्वरूप पर स्पष्ट नियम बनाए जाने की बात कही है।

मुख्य बातें (Highlights)

बदरीनाथ धाम में 19-20 सितंबर को ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल 2026’ हुआ।

कार्यक्रम का विषय ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ था।

कार्यक्रम के वीडियो में DJ और डांस के दृश्य सामने आए।

वीडियो सामने आने के बाद धार्मिक मर्यादा को लेकर विवाद शुरू हुआ।

मुरली मनोहर जोशी ने कार्यक्रम पर आपत्ति जताई।

उन्होंने बदरीनाथ में शंख बजाने की परंपरा का भी उल्लेख किया।

जोशी ने ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने की मांग की।

चमोली DM ने आयोजन से जुड़े अधिकारियों से जवाब मांगा है।

धार्मिक संगठनों और संतों ने भी कार्यक्रम के स्वरूप पर सवाल उठाए हैं।

FAQs
सवाल 1: बदरीनाथ में विवाद किस कार्यक्रम को लेकर है?

विवाद 19 और 20 सितंबर को आयोजित ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल 2026’ के दौरान हुए तेज संगीत और DJ कार्यक्रम के वीडियो को लेकर है।

सवाल 2: मुरली मनोहर जोशी ने क्या कहा?

उन्होंने बदरीनाथ जैसे धार्मिक स्थल पर DJ और संगीत समारोह के आयोजन पर आपत्ति जताई तथा ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने की मांग की।

सवाल 3: शंख बजाने का जिक्र क्यों हुआ?

जोशी और धार्मिक प्रतिनिधियों ने बदरीनाथ की ऐसी धार्मिक परंपराओं का उल्लेख किया, जिनमें शंख की ध्वनि को लेकर विशेष मान्यता बताई जाती है।

सवाल 4: DM ने क्या कार्रवाई की?

चमोली के जिलाधिकारी ने आयोजन से जुड़े अधिकारियों से अनुमति और कार्यक्रम की व्यवस्था को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।

सवाल 5: क्या कार्यक्रम आयोजित करने पर कोई अंतिम कार्रवाई हुई है?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रशासनिक स्तर पर जवाब और तथ्यों की जांच की जा रही है। आगे की कार्रवाई जांच और स्पष्टीकरण के आधार पर स्पष्ट होगी।

डिस्क्लेमर: इस खबर में कार्यक्रम, धार्मिक परंपराओं और प्रशासनिक कार्रवाई से संबंधित जानकारी उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित है। कार्यक्रम की अनुमति और नियमों के पालन से जुड़े तथ्यों पर प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

WRITTEN AND PUBLISHED BY SANDEEP SINGH, FOUNDER & EDITOR