
भारत-चीन संबंध: मोदी-शी जिनपिंग की वार्ता में सीमा, व्यापार और सहयोग पर चर्चा
नमस्कार दोस्तों,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की और रिश्तों को रणनीतिक तथा दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
सीमा विवाद और शांति पर चर्चा
बैठक में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए जरूरी बताया गया। पीएम मोदी ने सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों और व्यवस्थाओं का पालन करने पर जोर दिया।
दोनों नेताओं ने सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए।
वार्ता में आर्थिक और व्यापारिक संबंधों पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने व्यापार में संरचनात्मक असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत स्वीकार की।
इसके साथ ही, दोनों देशों के बीच बाजार तक सार्थक और पूर्वानुमानित पहुंच को सुगम बनाने पर भी जोर दिया गया।
मोदी और शी ने दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा की। बैठक में सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापारिक संबंधों और दोनों देशों के बीच आवाजाही को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया गया।
Press Information Bureau
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दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा आधार बढ़ाने तथा समान चुनौतियों से निपटने में सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई। पीएम मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के समर्थन और 2026 के सम्मेलन की सफलता में चीन के योगदान के लिए भी आभार व्यक्त किया।
मोदी और शी जिनपिंग की बैठक 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुई।
सीमा क्षेत्रों में शांति और मौजूदा समझौतों के पालन पर जोर दिया गया।
सीमा विवाद के पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
व्यापार असंतुलन, आपूर्ति श्रृंखला और बाजार पहुंच पर चर्चा हुई।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापारिक संबंधों और लोगों की आवाजाही को बढ़ावा देने पर जोर रहा।
बैठक 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन से इतर हुई।
दोनों नेताओं ने सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने, मौजूदा समझौतों का पालन करने और सीमा प्रश्न के पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की दिशा में काम करने पर जोर दिया।
व्यापार असंतुलन, आपूर्ति श्रृंखला संबंधी समस्याओं और बाजार तक बेहतर पहुंच पर चर्चा हुई।
हां, दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापारिक संपर्क और लोगों की आवाजाही को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया।


