
ईरान पर 48 घंटे में अमेरिका का दूसरा बड़ा हमला: 3 धमाकों से दहला बंदर अब्बास
वॉशिंगटन (द इंडियन न्यूज़पेपर ब्यूरो):
सीजफायर और शांति वार्ता की कोशिशों के बीच अमेरिका ने पिछले दो दिन के अंदर ईरान पर अपना दूसरा बड़ा हवाई हमला कर दिया है। 28 मई की सुबह इस हमले में ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदर अब्बास शहर के एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया। अमेरिका ने इस हमले के पीछे "आत्मरक्षा" (Self-Defence) का तर्क दिया है।
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरानी सेना की गतिविधियों से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज (Strait of Hormuz) में अमेरिकी सेना और कमर्शियल जहाजों के ट्रैफिक को भारी खतरा था।
4 ड्रोन को हवा में ही किया नष्ट
रॉयटर्स को एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इस सैन्य कार्रवाई के दौरान 4 घातक ईरानी ड्रोन हवा में ही मार गिराए गए हैं। इसके अलावा, ईरान के बंदर अब्बास में स्थित एक ग्राउंड स्टेशन को सीधा निशाना बनाया गया, जहां से पांचवा ड्रोन लॉन्च करने की तैयारी चल रही थी। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार रात करीब 1 बजकर 30 मिनट पर इलाके में 3 जोरदार धमाकों की आवाज़ें सुनाई दीं, जिसके बाद ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी: "या तो हम संतुष्ट होंगे, या काम खत्म करेंगे"
इस हमले से ठीक पहले, 27 मई को वाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर बेहद कड़ा रुख अपनाया था। ट्रंप ने कहा, "ईरान बहुत दिल से चाहता है कि डील हो जाए। लेकिन बात जहां तक पहुंची है, हम उससे संतुष्ट नहीं हैं। या तो हम संतुष्ट हो जाएंगे, या फिर हम अपना काम ख़त्म करेंगे।"
ट्रंप ने मीटिंग के दौरान उस रिपोर्ट को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में यातायात की कमान ईरान और ओमान मिलकर संभालेंगे। ट्रंप ने साफ किया कि होर्मुज पर किसी एक देश का कंट्रोल नहीं होगा, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है।
ईरान का पलटवार करने का दावा
इस बीच, ईरान के IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के डिप्टी पॉलिटिकल चीफ मोहम्मद अकबरज़ादेह ने ईरानी मीडिया को बताया कि हालांकि फुल-स्केल जंग दोबारा शुरू होने की संभावना कम है, लेकिन अगर अमेरिका ऐसी कार्रवाई जारी रखता है, तो ईरान मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
एक हफ्ते में यह दूसरा बड़ा हमला
इससे पहले 26 मई (मंगलवार) को भी अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के शहर बंदर अब्बास में मिसाइल लॉन्च साइट्स और नावों को निशाना बनाया था। अमेरिका का दावा था कि उन नावों के जरिए समुद्र में बारूदी सुरंगें (Mines) बिछाई जा रही थीं।


