
मोहम्मद शमी के भाई पर यौन शोषण का आरोप, शादी का वादा कर संबंध बनाने का दावा; पुलिस जांच में जुटी
नमस्कार दोस्तों,
भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी के भाई मोहम्मद कैफ के खिलाफ लखनऊ में एक महिला की शिकायत पर यौन शोषण, धोखाधड़ी और धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कैफ ने शादी का भरोसा देकर उनके साथ संबंध बनाए, लेकिन बाद में शादी से जुड़ा फैसला टालते रहे। ये आरोप हैं, जिनकी अभी न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शिकायतकर्ता एक तलाकशुदा महिला हैं और उनका एक बेटा है। FIR में दर्ज कथित विवरण के अनुसार, उनकी कैफ से 2020 में एक साझा परिचित के जरिए मुलाकात हुई थी। उस समय महिला गाजियाबाद में रहती थीं। महिला का दावा है कि कैफ को उनकी पिछली शादी और बच्चे के बारे में जानकारी थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कैफ ने शादी का भरोसा देकर महिला के साथ संबंध बनाए। महिला ने दावा किया कि 9 दिसंबर 2023 को कोलकाता के एक होटल में भी शादी का वादा करके उनके साथ यौन संबंध बनाए गए। शिकायत के मुताबिक, बाद में भी अलग-अलग जगहों पर संबंध बने।
महिला का आरोप है कि दिसंबर 2025 में IPL नीलामी के बाद कैफ ने फिर शादी का भरोसा दिया, लेकिन इसके बाद भी शादी को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया। इसी के बाद महिला ने पुलिस से संपर्क किया।
महिला ने आरोप लगाया है कि कैफ ने उनकी नौकरी को लेकर आपत्ति जताई और उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए दबाव दिया। रिपोर्ट के अनुसार, महिला 2023 से 2026 के बीच दिल्ली की एक एयरलाइन में केबिन क्रू के तौर पर काम कर रही थीं।
शिकायत में कैफ के भाई हसीब पर भी धमकी देने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
मोहम्मद शमी के भाई मोहम्मद कैफ के खिलाफ लखनऊ में मामला दर्ज।
शिकायतकर्ता महिला का दावा है कि दोनों की मुलाकात 2020 में साझा परिचित के जरिए हुई।
महिला ने शादी का वादा कर संबंध बनाने का आरोप लगाया।
9 दिसंबर 2023 को कोलकाता के होटल में यौन शोषण का आरोप भी शिकायत में शामिल।
नौकरी छोड़ने के लिए दबाव डालने का आरोप।
कैफ के भाई हसीब पर धमकी देने का आरोप।
पुलिस मामले की जांच कर रही है; आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।
⚠︎ Disclaimer: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और FIR में बताए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र या न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। सभी संबंधित पक्षों का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।


