
Marital Rape पर SC में बड़ी सुनवाई, केंद्र बोला- अपराध बनाना संसद का काम
नमस्कार दोस्तों,
वैवाहिक बलात्कार यानी Marital Rape को अपराध की श्रेणी में लाने की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि किसी नए अपराध को परिभाषित करना और उसे कानून में शामिल करना संसद और विधायिका के अधिकार क्षेत्र का विषय है, सुप्रीम कोर्ट का नहीं।
मामले का केंद्र Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धारा 63 के Exception 2 पर है। इसके तहत 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र की पत्नी के साथ पति द्वारा किया गया यौन संबंध, मौजूदा कानून में बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता। यही अपवाद पहले IPC की धारा 375 में भी था।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अहम सवाल उठाया कि अगर कानून किसी कृत्य को स्पष्ट रूप से बलात्कार के अपराध से बाहर रखता है, तो क्या अदालत उस मौजूदा अपवाद के रहते पति के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा चलाने की अनुमति दे सकती है।
पीठ ने यह भी कहा कि विवाह किसी महिला की व्यक्तिगत स्वायत्तता खत्म नहीं कर सकता और जबरन यौन संबंध की शिकार महिला को पीठ ने “victim” माना।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 20(1) का भी उल्लेख किया। अदालत ने सवाल उठाया कि जिस समय कोई कृत्य कानून के तहत अपराध नहीं था, उसके लिए किसी व्यक्ति पर आपराधिक कार्रवाई किस सीमा तक की जा सकती है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में मुख्य रूप से दो सवालों पर विचार होगा:
अगर Marital Rape Exception कानून में बना रहता है, तो क्या पति के खिलाफ बलात्कार का अभियोजन चल सकता है?
क्या BNS में मौजूद यह वैवाहिक बलात्कार अपवाद संवैधानिक रूप से वैध है?
सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई तीन सप्ताह बाद शुरू करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के सामने कर्नाटक हाई कोर्ट के 2022 के उस फैसले से जुड़ा मामला भी है, जिसमें एक पति के खिलाफ वैवाहिक बलात्कार के आरोप में मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा दिल्ली हाई कोर्ट के 2022 के स्प्लिट वर्डिक्ट से जुड़े मामले भी सुप्रीम कोर्ट के सामने हैं।
Marital Rape को अपराध बनाने की मांग पर SC में सुनवाई हुई।
केंद्र ने कहा- अपराध को कानून में शामिल करना संसद का काम है।
BNS की धारा 63 में वैवाहिक बलात्कार का अपवाद मौजूद है।
SC ने पूछा- अपवाद रहते पति के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा कैसे चल सकता है?
कोर्ट ने कहा कि विवाह महिला की व्यक्तिगत स्वायत्तता खत्म नहीं करता।
अनुच्छेद 20(1) के कानूनी संरक्षण पर भी चर्चा हुई।
SC दो प्रमुख संवैधानिक और कानूनी सवालों पर विचार करेगा।
अंतिम सुनवाई तीन सप्ताह बाद शुरू होगी।
जवाब: मौजूदा BNS में 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र की पत्नी के साथ पति के यौन संबंध को बलात्कार की परिभाषा से बाहर रखने वाला अपवाद मौजूद है।
जवाब: केंद्र का कहना है कि Marital Rape को अपराध घोषित करने का फैसला संसद और विधायिका के क्षेत्र में आता है।
जवाब: नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। अदालत संवैधानिक वैधता और अभियोजन से जुड़े सवालों पर विचार करेगी।
जवाब: सुप्रीम कोर्ट तीन सप्ताह बाद याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू करेगा। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि मौजूदा वैवाहिक बलात्कार अपवाद संवैधानिक रूप से कायम रह सकता है या नहीं।
⚠︎ Disclaimer:
यह खबर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई और उपलब्ध न्यायिक एवं मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। Marital Rape Exception की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।


