
पश्चिम बंगाल: चुनाव हारने के बाद TMC में भगदड़, 100 से ज़्यादा पार्षदों ने दिया इस्तीफा; सांसद भी BJP की बैठक में हुए शामिल
कोलकाता (द इंडियन न्यूजपेपर ब्यूरो):
पश्चिम बंगाल में 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद विधानसभा चुनाव 2026 में सत्ता गंवाने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब अपने सबसे बुरे दौर का सामना कर रही है। नई बीजेपी सरकार के गठन के बाद से ही टीएमसी के भीतर बड़े पैमाने पर पलायन और असंतोष देखने को मिल रहा है। ज़मीनी स्तर के नेताओं से लेकर बड़े चेहरों तक, पार्टी का ढांचा कमज़ोर होता दिख रहा है।
100 से ज़्यादा पार्षदों ने छोड़े पद
राज्य के अलग-अलग ज़िलों से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में 100 से ज़्यादा टीएमसी पार्षदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
भटपारा नगर पालिका (35 में से 30 इस्तीफे), उत्तर बैरकपुर (20 में से 15), गरुड़लिया (21 में से 18) और डायमंड हार्बर जैसे टीएमसी के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा पार्टी के लिए बड़ा झटका है। कई पार्षदों ने आरोप लगाया है कि उन्हें शीर्ष नेतृत्व से कोई समर्थन या मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है।
सांसद और विधायकों ने की CM सुवेंदु अधिकारी की बैठक में शिरकत
पार्टी के लिए दूसरी बड़ी चिंता तब खड़ी हुई, जब टीएमसी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने 6 अन्य टीएमसी विधायकों के साथ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की एक प्रशासनिक बैठक में हिस्सा लिया।
हालांकि, काकोली घोष (जिन्होंने हाल ही में टीएमसी के ज़िला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था) ने इसे सिर्फ एक प्रशासनिक बैठक बताया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे टीएमसी में हो रही एक बड़ी टूट के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
भ्रष्टाचार की जांच और नेताओं में बेचैनी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टीएमसी नेताओं में यह बेचैनी नई सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में की जा रही सख्त कार्रवाई के कारण भी है। हाल ही में जबरन वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप में कुछ स्थानीय टीएमसी नेताओं को गिरफ्तार किया गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली नई सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पुरानी सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार के मामलों की गहराई से जांच की जाएगी।
नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर भी असमंजस
पार्टी की मुश्किल यहीं खत्म नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (जिन्होंने भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों जगहों से जीत दर्ज की थी) ने नंदीग्राम सीट खाली कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीएमसी को इस आगामी उपचुनाव के लिए एक मज़बूत उम्मीदवार ढूंढने में भी भारी संघर्ष करना पड़ रहा है, क्योंकि पार्टी के कई नेता इस सीट से चुनाव लड़ने से कतरा रहे हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी को इस बड़े राजनीतिक बिखराव से कैसे बचा पाती हैं, या फिर आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में कोई और बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा।


