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GENERAL | 2026-06-05
अमरनाथ यात्रा: पहाड़ों पर जमा हो रहा 400 टन कचरा, प्रकृति को बचाने के लिए नई पहल शुरू

अमरनाथ यात्रा: पहाड़ों पर जमा हो रहा 400 टन कचरा, प्रकृति को बचाने के लिए नई पहल शुरू

द इंडियन न्यूजपेपर ब्यूरो:

हर साल अमरनाथ गुफा के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पहुंचते हैं। कैंप से लेकर पवित्र गुफा तक के करीब 3 दिन के इस सफर में यात्रियों की आस्था तो देखते ही बनती है, लेकिन इस दौरान हिमालय की खूबसूरत वादियों में जो कचरे का अंबार लग रहा है, वह एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

अक्सर कई यात्री अनजाने में पानी की बोतलें, प्लास्टिक, पन्नी और खाने-पीने के खाली पैकेट रास्ते में ही फेंक देते हैं। आइए जानते हैं कि इस छोटी सी लापरवाही का पहाड़ों पर कितना बड़ा असर पड़ रहा है और इसे रोकने के लिए क्या प्लान बनाया जा रहा है:

एक पन्नी से कैसे बनता है कचरे का पहाड़?

अक्सर लोगों को लगता है कि "मेरे एक छोटी सी पन्नी फेंकने से क्या ही हो जाएगा?" लेकिन जरा सोचिए, जब हर साल 5 लाख से ज्यादा लोग यात्रा पर जाते हैं और उनमें से हर कोई एक-एक पन्नी भी फेंकता है, तो वह कई टन बदबूदार कचरे में तब्दील हो जाता है। यह प्लास्टिक और कचरा हिमालय की संवेदनशील प्रकृति को भारी नुकसान पहुंचा रहा है और वहां कई तरह की बीमारियों के पनपने का खतरा भी बढ़ा रहा है।

पिछले साल पहाड़ों से निकाला गया 400 टन कचरा
कचरा प्रबंधन (Waste Management) करने वाली कंपनियों की रिपोर्ट के आंकड़े हैरान करने वाले हैं।

पिछले साल करीब 5 लाख श्रद्धालुओं ने अमरनाथ यात्रा की थी।

इस 2 महीने की यात्रा के दौरान सफाई कंपनियों ने पहाड़ों से लगभग 400 टन कचरा इकट्ठा किया था।

इतने भारी कचरे को पहाड़ों से नीचे लाने के लिए हजारों सफाई कर्मचारियों और घोड़ों की मदद लेनी पड़ी थी, जो अपने आप में एक बहुत ही मुश्किल काम है।

"पुरानी प्रथा पर लौटना होगा" - कचरा कम करने का नया प्लान

इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलने वाली है। यात्रा शुरू होने से पहले ही कचरा प्रबंधन कंपनियां यात्रियों को जागरूक करने के प्लान पर काम कर रही हैं।

वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी के को-फाउंडर समीर शर्मा ने अपने प्लान के बारे में बताते हुए कहा है कि हमें "पुरानी प्रथाओं पर लौटना होगा।" उनका सुझाव है कि यात्रियों को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के बजाय ऐसी चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए जिन्हें दोबारा उपयोग (Reuse) किया जा सके। जैसे- पानी की अपनी पक्की बोतलें, कपड़े के बैग और अपने खाने-पीने के बर्तन। अगर सभी यात्री इस छोटी सी बात का ध्यान रखें, तो पहाड़ों पर फैलने वाले कचरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

जरूरी सवाल-जवाब (FAQs)
सवाल 1: साल 2026 में अमरनाथ यात्रा कब से शुरू हो रही है?

जवाब: इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होगी और 28 अगस्त तक चलेगी।

सवाल 2: पिछले साल अमरनाथ यात्रा के दौरान कितना कचरा जमा हुआ था?

जवाब: रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल लगभग 5 लाख यात्रियों ने दर्शन किए थे और सफाई कर्मचारियों ने पहाड़ों से करीब 400 टन कचरा इकट्ठा किया था।

सवाल 3: यात्री पहाड़ों पर कचरा कम करने में कैसे मदद कर सकते हैं?

जवाब: यात्री प्लास्टिक की थैलियों और डिस्पोजेबल बोतलों की जगह कपड़े के बैग और दोबारा इस्तेमाल होने वाले (Reusable) बर्तनों/बोतलों का उपयोग करके पर्यावरण को बचाने में अपना योगदान दे सकते हैं।

Short Disclaimer: यह न्यूज़ आर्टिकल पर्यावरण जागरूकता और वेस्ट मैनेजमेंट कंपनियों की पिछली रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। हमारा उद्देश्य हिमालय की स्वच्छता और प्रकृति के प्रति यात्रियों को जागरूक करना है।
WRITTEN AND PUBLISHED BY SANDEEP SINGH, FOUNDER & EDITOR