
लाहौर में बदला 'बाबरी मस्जिद चौक' का नाम: मरियम नवाज सरकार ने बहाल किया पुराना नाम 'जैन मंदिर चौक', कृष्ण नगर की भी हुई वापसी
लाहौर: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने लाहौर शहर की ऐतिहासिक और साझी सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। पंजाब सरकार ने 'लाहौर हेरिटेज प्रोजेक्ट' के तहत शहर के कई प्रमुख चौकों, सड़कों और मोहल्लों के नामों को बदलकर उनके 1947 के विभाजन से पहले वाले पुराने ऐतिहासिक नाम वापस लागू कर दिए हैं।
इस नए फैसले के तहत लाहौर के सबसे चर्चित 'बाबरी मस्जिद चौक' का नाम अब आधिकारिक तौर पर बदलकर फिर से 'जैन मंदिर चौक' (Jain Mandir Chowk) कर दिया गया है। गौरतलब है कि 1990 के दशक में इस ऐतिहासिक चौक का नाम बदला गया था, जिसे अब सरकार ने दोबारा बहाल कर दिया है।
🔹 'लाहौर हेरिटेज प्रोजेक्ट' के तहत हुआ बदलाव
यह पूरा बदलाव 'लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल' प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के मार्गदर्शन और वर्तमान मुख्यमंत्री मरियम नवाज की मंजूरी के बाद धरातल पर उतारा जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य विभाजन से पहले की ऐतिहासिक विरासत और पुरानी पहचान को सहेजना है।
🔹 इन प्रमुख इलाकों को भी मिले उनके पुराने नाम
प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूची के मुताबिक, सिर्फ जैन मंदिर चौक ही नहीं, बल्कि लाहौर के कई अन्य प्रसिद्ध इलाकों को भी उनके विभाजन के पहले वाले नाम वापस मिले हैं:
कृष्ण नगर की वापसी: पहले जिस प्रसिद्ध इलाके को सरकारी दस्तावेजों में 'इस्लामपुरा' नाम दिया गया था, उसे अब दोबारा उसके पुराने ऐतिहासिक नाम 'कृष्ण नगर' से जाना जाएगा।
संत नगर की बहाली: 'सुन्नत नगर' का नाम प्रशासनिक तौर पर बदलकर अब फिर से 'संत नगर' कर दिया गया है।
धर्मपुरा और लक्ष्मी चौक: 'मुस्तफाबाद' को उसका पुराना नाम 'धर्मपुरा' और मौलाना जफर अली खान चौक को फिर से आम जनता के बीच बेहद लोकप्रिय नाम 'लक्ष्मी चौक' दिया गया है।
🔹 जमीनी स्तर पर काम शुरू
स्थानीय प्रशासन और लाहौर डेवलपमेंट अथॉरिटी ने इन सभी चिन्हित जगहों पर नए नाम वाले आधिकारिक साइनबोर्ड लगाने का काम तेजी से शुरू कर दिया है। भू-विज्ञानी और इतिहासकारों का मानना है कि सरकारी कागजों में नाम बदलने के बावजूद, स्थानीय जनता के बीच ये इलाके आज भी अपने पुराने और पारंपरिक नामों (जैसे लक्ष्मी चौक और जैन मंदिर चौक) से ही सबसे ज्यादा मशहूर थे। सरकार के इस कदम को पुरानी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।


