Morning News Delivery
Morning Prayers and Tea
GENERAL / LATEST NEWS | 2026-10-05
छगन भुजबल को कलिना लाइब्रेरी केस में राहत, विशेष अदालत ने किया आरोपमुक्त

छगन भुजबल को कलिना लाइब्रेरी केस में राहत, विशेष अदालत ने किया आरोपमुक्त

द इंडियन न्यूजपेपर ब्यूरो:

नमस्कार दोस्तों,

महाराष्ट्र के मंत्री और NCP नेता छगन भुजबल को मुंबई की विशेष अदालत से कलिना सेंट्रल लाइब्रेरी मामले में बड़ी राहत मिली है। अदालत ने 24 सितंबर 2026 को उन्हें और मामले के अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। यह मामला मुंबई यूनिवर्सिटी के कलिना परिसर में लाइब्रेरी निर्माण परियोजना से जुड़ा था।

यह मामला एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की ओर से दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री के रूप में भुजबल ने एक निजी डेवलपर को फायदा पहुंचाने के लिए प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को समर्थन दिया, जिससे राज्य को करीब 75-79 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप लगाया गया था।

कोर्ट ने क्या कहा?

विशेष अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष भुजबल के आधिकारिक फैसलों और कथित आपराधिक साजिश के बीच जरूरी संबंध स्थापित नहीं कर सका। अदालत के मुताबिक, भुजबल के खिलाफ कथित “अदृश्य समर्थन” या अनुमान के आधार पर आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए पर्याप्त स्वतंत्र सबूत मौजूद नहीं थे।

अदालत ने यह भी पाया कि अभियोजन पक्ष भुजबल की ओर से किसी कथित मांग, लाइब्रेरी ठेके और उनकी संस्था को मिले 2.5 करोड़ रुपये के बीच सीधे संबंध या कथित quid pro quo को साबित नहीं कर सका।

क्या था कलिना लाइब्रेरी मामला?

ACB के मुताबिक, मुंबई यूनिवर्सिटी ने कलिना परिसर की जमीन का एक हिस्सा राज्य सरकार को केंद्रीय पुस्तकालय के निर्माण के लिए उपलब्ध कराया था। बाद में परियोजना से जुड़ी जमीन और निजी डेवलपर को दी गई लीज को लेकर जांच एजेंसी ने अनियमितताओं के आरोप लगाए थे।

मामले में आरोप था कि शेष जमीन का एक हिस्सा 99 साल की लीज पर बेहद कम दर पर दिया गया। ACB ने इसे राज्य को वित्तीय नुकसान पहुंचाने वाली प्रक्रिया बताते हुए जांच की थी। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर भुजबल के खिलाफ आपराधिक साजिश स्थापित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया।

11 साल पुरानी कानूनी प्रक्रिया का अंत

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इस आदेश के बाद भुजबल के खिलाफ 2004 से 2014 के बीच उनके PWD मंत्री रहने के दौरान ACB द्वारा दर्ज किए गए लंबित भ्रष्टाचार मामलों में यह आखिरी मामला भी समाप्त हो गया। जनवरी 2026 में उन्हें एक संबंधित ED मामले में भी आरोपमुक्त किया गया था।

मुख्य बातें (Highlights)

छगन भुजबल को कलिना लाइब्रेरी मामले में विशेष अदालत ने आरोपमुक्त किया।

मामला मुंबई यूनिवर्सिटी के कलिना परिसर की लाइब्रेरी परियोजना से जुड़ा था।

ACB ने निजी डेवलपर को फायदा पहुंचाने और राज्य को आर्थिक नुकसान के आरोप लगाए थे।

अदालत ने भुजबल और कथित आपराधिक साजिश के बीच पर्याप्त संबंध स्थापित नहीं होने की बात कही।

अदालत के आदेश के बाद इस मामले में उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो गई।

FAQs
सवाल 1: छगन भुजबल को किस मामले में राहत मिली?

उन्हें मुंबई यूनिवर्सिटी के कलिना परिसर में केंद्रीय पुस्तकालय निर्माण से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में आरोपमुक्त किया गया है।

सवाल 2: ACB ने भुजबल पर क्या आरोप लगाए थे?

ACB ने आरोप लगाया था कि परियोजना की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के जरिए एक निजी डेवलपर को फायदा पहुंचाया गया और राज्य को आर्थिक नुकसान हुआ।

सवाल 3: कोर्ट ने भुजबल को आरोपमुक्त क्यों किया?

अदालत के अनुसार, अभियोजन पक्ष भुजबल के आधिकारिक कार्यों और कथित आपराधिक साजिश के बीच आवश्यक संबंध स्थापित करने के लिए पर्याप्त सामग्री पेश नहीं कर सका।

सवाल 4: क्या इसका मतलब आरोप अदालत में साबित हो गए थे?

नहीं। अदालत ने उपलब्ध अभियोजन सामग्री के आधार पर आरोपमुक्त किया है। इसका अर्थ यह है कि इस मामले में उनके खिलाफ मुकदमा आगे चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया गया।

डिस्क्लेमर:

यह रिपोर्ट अदालत के आदेश और उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। ACB द्वारा लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। अदालत के विस्तृत आदेश के सभी पहलू सार्वजनिक होने के बाद मामले की कानूनी स्थिति की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

WRITTEN AND PUBLISHED BY SANDEEP SINGH, FOUNDER & EDITOR