
कपिल सिब्बल बोले- नई दिल्ली घोषणापत्र भारत की उपलब्धि, लेकिन BRICS सम्मेलन से चीन को ज्यादा फायदा
नमस्कार दोस्तों,
राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने नई दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संयुक्त घोषणापत्र पर बिना विवाद सहमति बनना भारत सरकार की उल्लेखनीय उपलब्धि है। हालांकि, उनका मानना है कि सम्मेलन से चीन को सबसे ज्यादा फायदा हुआ।
14 सितंबर को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने BRICS को अलग-अलग हितों वाले देशों का समूह बताया। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच मतभेदों के बावजूद साझा घोषणापत्र जारी कर पाना आसान नहीं था।
सिब्बल के मुताबिक, भारत नहीं चाहता कि BRICS को पश्चिम-विरोधी गठबंधन के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि रूस और चीन इसे ऐसे गठबंधन के रूप में देखना चाहते हैं, जबकि भारत की प्राथमिकता व्यावहारिक सहयोग और संतुलित कूटनीति है।
सिब्बल ने कहा कि नई दिल्ली घोषणापत्र में किसी वैकल्पिक साझा मुद्रा या डॉलर से दूरी बनाने की मांग शामिल नहीं थी। उन्होंने इसे भारत के लिए उपलब्धि बताया।
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उन्होंने यह भी कहा कि घोषणापत्र में फिलिस्तीन और दो-राष्ट्र समाधान का उल्लेख मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाता है।
सिब्बल ने कहा कि BRICS सम्मेलन से चीन को सबसे अधिक लाभ मिला। यह उनका राजनीतिक आकलन है। सम्मेलन में सदस्य देशों ने व्यापार, निवेश, भुगतान प्रणालियों और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा की थी।
कपिल सिब्बल ने नई दिल्ली BRICS घोषणापत्र को भारत की उपलब्धि बताया।
उनके मुताबिक, चीन को सम्मेलन से सबसे ज्यादा फायदा हुआ।
उन्होंने BRICS को अलग-अलग हितों वाले देशों का समूह कहा।
सिब्बल ने कहा कि भारत BRICS को पश्चिम-विरोधी गठबंधन नहीं बनाना चाहता।
साझा वैकल्पिक मुद्रा या डॉलर से दूरी बनाने का प्रस्ताव घोषणापत्र में नहीं था।
⚠︎ Disclaimer: यह खबर कपिल सिब्बल के सार्वजनिक बयान और उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। चीन को सम्मेलन से सबसे अधिक लाभ होने संबंधी बात उनका आकलन है, स्थापित आधिकारिक निष्कर्ष नहीं।


