
जानिए कौन हैं मद्रास HC के वो 2 जज, जिन्होंने खुली अदालत में कहा- "सिस्टम में पहले भी भ्रष्ट जज थे और आज भी हैं"
चेन्नई (द इंडियन न्यूज़पेपर ब्यूरो):
मद्रास हाई कोर्ट (Madras High Court) की एक बेंच ने न्यायिक प्रणाली को लेकर एक ऐसी बेबाक टिप्पणी की है, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। तमिल फिल्म 'करुप्पु' (Karuppu) पर बैन लगाने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दो जजों की बेंच ने खुली अदालत में यह स्वीकार किया कि न्यायपालिका में भी भ्रष्टाचार मौजूद है। बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि जजों को 'पवित्र गाय' (Holy Cow) समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए।
"भ्रष्ट तत्वों को दिखाया जाता है बाहर का रास्ता"
इस मामले की सुनवाई जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन की बेंच कर रही थी। सुनवाई के दौरान बेंच ने बेहद कड़े शब्दों में कहा, "कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है। इस सिस्टम में पहले भी भ्रष्ट जज थे और आज भी हैं। हम इस बात को अच्छी तरह जानते हैं और हमने खुद न्यायिक भ्रष्टाचार के ऐसे मामले देखे हैं। हालांकि, मद्रास हाई कोर्ट नियमित रूप से ऐसे भ्रष्ट तत्वों को बाहर का रास्ता भी दिखाता है।"
सिस्टम पर बेबाक टिप्पणी करने वाले ये दोनों जज कौन हैं?
जस्टिस जीआर स्वामीनाथन की प्रोफाइल:
जस्टिस स्वामीनाथन का जन्म साल 1968 में हुआ था और वे तमिलनाडु के तिरुवरूर के रहने वाले हैं। 1990 में अपनी LLB की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1991 में वकालत शुरू की। वे अपने परिवार से कानून के पेशे में आने वाले पहले व्यक्ति हैं। चेन्नई में 13 साल तक प्रैक्टिस करने के बाद वे मदुरै शिफ्ट हो गए।
साल 2014 में उन्हें मदुरै बेंच में भारत सरकार का असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया और जून 2017 में वे मद्रास हाई कोर्ट के जज बने। जस्टिस स्वामीनाथन अब तक 50 हजार से ज्यादा फैसले सुना चुके हैं। वे नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी, भोपाल में एक एक्सपर्ट के तौर पर भी अपनी सेवाएं देते हैं। उनका कार्यकाल 31 मई, 2030 तक रहेगा।
जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन की प्रोफाइल:
जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन को फरवरी 2023 में मद्रास हाई कोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त किया गया था। 4 अक्टूबर 1970 को जन्मे जस्टिस लक्ष्मीनारायणन ने बेंगलुरु के प्रतिष्ठित नेशनल लॉ स्कूल से अपनी पढ़ाई की है। उन्होंने 1995 में बतौर वकील अपना रजिस्ट्रेशन कराया था।
अपने लंबे करियर में उन्होंने संवैधानिक, सिविल, क्रिमिनल और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स जैसे गंभीर विषयों पर वकालत की है। मद्रास हाई कोर्ट के अलावा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट सहित कई अन्य राज्यों के हाई कोर्ट्स में भी पैरवी की है। वे साल 2010 से 'मद्रास लॉ जर्नल' के डिप्टी एडिटर इन चीफ भी हैं और एकेडमिक्स में उनकी गहरी रुचि रही है।


