
कैबिनेट ने पेपर लीक पर सख्त कानून वाले संशोधन विधेयक को दी मंजूरी, संसद में जल्द हो सकता है पेश
नमस्कार दोस्तों,
पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में धोखाधड़ी पर सख्ती बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाना और संगठित पेपर लीक गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई करना है।
कैबिनेट से मंजूर प्रस्ताव के अनुसार, पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों में सजा को और सख्त बनाने की तैयारी है। प्रस्तावित संशोधन में प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं—
संगठित पेपर लीक मामलों में 5 से 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान।
दोषी पाए जाने पर 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
NTA, UPSC, SSC और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में कानून को और प्रभावी बनाया जाएगा।
मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है।
कैबिनेट बैठक से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पेपर लीक से जुड़े मामलों में दोषियों को जल्द और कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस संशोधन विधेयक को संसद के मौजूदा सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। संसद से मंजूरी मिलने के बाद ही यह संशोधित कानून लागू हो सकेगा।
हाल के वर्षों में कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इन्हीं घटनाओं के बाद परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की मांग लगातार उठ रही थी। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक कानून में संशोधन वाले विधेयक को मंजूरी दी।
संगठित पेपर लीक मामलों में 5 से 10 वर्ष तक की सजा का प्रस्ताव।
10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए मामलों की जल्द सुनवाई की तैयारी।
संसद की मंजूरी के बाद ही संशोधित कानून लागू होगा।
जवाब: सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन से जुड़े विधेयक को।
जवाब: प्रस्तावित संशोधन के अनुसार संगठित मामलों में 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
जवाब: प्रस्तावित संशोधन में 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
जवाब: हाँ, सरकार ने पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था करने की घोषणा की है।
जवाब: संसद से पारित होने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संशोधित कानून लागू होगा।
⚠︎ Disclaimer:
यह समाचार केंद्रीय सरकार की घोषणाओं और विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। विधेयक के प्रावधान संसद से पारित होने के बाद अंतिम रूप से लागू होंगे।


