
अयोध्या राम मंदिर दान मामला: UP सरकार ने गठित की SIT, पैसे गिनने वाले कर्मचारी के घर से 10 लाख रुपये बरामद
अयोध्या श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में कथित वित्तीय अनियमितताओं (गड़बड़ी) का मामला अब गहराता जा रहा है। इस मामले में विपक्ष के सवालों और राम मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT - Special Investigation Team) का गठन कर दिया है। इस जांच के बीच पुलिस ने एक संदिग्ध कर्मचारी को हिरासत में लिया है, जिसके घर से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई है।
कर्मचारी के घर छापेमारी: पुलिस और एसओजी (SOG) की टीम ने मंदिर में चढ़ावे की रकम गिनने वाले एक संविदा कर्मचारी 'लवकुश मिश्रा' के आवास पर छापा मारा। जांच के दौरान कर्मचारी के घर से करीब 10 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई।
अनोखे तरीके से छिपाई थी नकदी: जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी कर्मचारी ने पकड़े जाने के डर से पैसों को बहुत ही अजीब तरीके से छिपाया था। बरामद रकम का कुछ हिस्सा घर की अलमारी में रखा था, जबकि बाकी बची हुई नकदी को घर के बाहर गोबर के ढेर के नीचे दबाकर छिपाया गया था। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
SIT करेगी पूरी जांच: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बनी इस 3 सदस्यीय एसआईटी में लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार शामिल हैं। यह टीम एक हफ्ते के भीतर अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी और मंदिर के खातों का पूरा ऑडिट करेगी।
जवाब: इस उच्च स्तरीय जांच टीम (SIT) की कमान लखनऊ के मंडलायुक्त (IAS) विजय विश्वास पंत को सौंपी गई है।
जवाब: दान राशि की गिनती करने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा को हिरासत में लिया गया है, जिसके घर से लगभग 10 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं।
जवाब: इस मामले को सबसे पहले स्थानीय नेताओं और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा सोशल मीडिया पर उठाया गया था, जिसके बाद मंदिर ट्रस्ट ने खुद सरकार से स्वतंत्र जांच की मांग की।
⚠︎Short Disclaimer: यह लेख सरकारी आदेशों और मीडिया रिपोर्ट्स के प्रमाणित तथ्यों पर आधारित है। मामले की कानूनी जांच और ऑडिट अभी जारी है, हमारा उद्देश्य पाठकों तक केवल निष्पक्ष और शुरुआती जानकारी पहुंचाना है।
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