
ब्रिक्स समिट 2026: भारत का संतुलन—अमेरिका से रिश्ते और चीन के साथ सहयोग
नमस्कार दोस्तों,
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के बाद भारत की विदेश नीति को लेकर चर्चा तेज हुई है। सवाल उठ रहा है कि क्या भारत ने अमेरिका के साथ अपने संबंधों को ध्यान में रखते हुए ब्रिक्स के भीतर चीन के साथ सहयोग का रास्ता अपनाया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इसे अमेरिका के पक्ष में भारत का कोई स्पष्ट या औपचारिक कदम कहना सही नहीं होगा।
भारत ब्रिक्स को अमेरिका-विरोधी गठबंधन के रूप में पेश करने के बजाय आर्थिक और वैश्विक सहयोग के मंच के तौर पर देखता रहा है। सम्मेलन की संयुक्त घोषणा में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान सहयोग जैसे मुद्दों पर जोर रहा, लेकिन साझा ब्रिक्स मुद्रा को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों के संदर्भ में अहम रही। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच सीमा संबंधी मुद्दों और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर बातचीत हुई। हालांकि, सीमा विवाद, आपसी अविश्वास और व्यापार असंतुलन जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।
सम्मेलन में भारत ने डिजिटल बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, उद्योग और आर्थिक सहयोग से जुड़ी पहलों को आगे बढ़ाया। संयुक्त घोषणा में स्थानीय मुद्रा में लेनदेन और भुगतान प्रणालियों के बीच सहयोग को समर्थन मिला। वहीं, चीन के नेतृत्व वाली mBridge भुगतान व्यवस्था को लेकर भारत की अलग स्थिति भी रिपोर्ट में सामने आई।
यह शीर्षक एक विश्लेषणात्मक सवाल है, न कि सम्मेलन से साबित हुआ निष्कर्ष। उपलब्ध रिपोर्टें भारत की रणनीति को अमेरिका और चीन—दोनों के साथ संबंध बनाए रखने तथा ब्रिक्स को व्यावहारिक सहयोग के मंच के रूप में रखने की कोशिश बताती हैं। भारत ने चीन के साथ संवाद जारी रखा, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि उसने अमेरिका के पक्ष में कोई औपचारिक गठबंधन या प्रतिबद्धता की है।
ब्रिक्स सम्मेलन नई दिल्ली में 12–13 सितंबर 2026 को आयोजित हुआ।
भारत ने ब्रिक्स को अमेरिका-विरोधी गठबंधन के बजाय सहयोग के मंच के रूप में रखने पर जोर दिया।
चीन के साथ संवाद और आर्थिक सहयोग पर चर्चा हुई।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने पर सहमति बनी, लेकिन साझा ब्रिक्स मुद्रा पर निर्णय नहीं हुआ।
भारत की नीति को अमेरिका और चीन के साथ संतुलित संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई औपचारिक निर्णय दर्ज नहीं है। भारत ने ब्रिक्स को व्यापक सहयोग के मंच के रूप में रखने पर जोर दिया।
दोनों देशों के बीच संवाद और संबंध सुधारने के प्रयास जारी हैं, लेकिन सीमा और व्यापार से जुड़े मतभेद बने हुए हैं।
नहीं। सम्मेलन में स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन और भुगतान सहयोग पर चर्चा हुई, साझा मुद्रा पर फैसला नहीं हुआ।


