
कानपुर हत्याकांड का खुलासा: पति की हत्या कर 8 महीने तक 'बागेश्वर धाम' में छिपे रहे देवर-भाभी, एक फोन कॉल से खुला राज
उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक हैरान करने वाला आपराधिक मामला सामने आया, जहाँ पुलिस ने 8 महीने से फरार चल रहे दो हत्यारोपियों को मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम से गिरफ्तार किया। दोनों आरोपी अपनी पहचान छिपाकर आश्रम में सेवादार के रूप में रह रहे थे।
Full Description (पूरा विवरण):
कानपुर (द इंडियन न्यूजपेपर ब्यूरो): अपराध चाहे कितना भी शातिर तरीके से क्यों न किया जाए, कानून के हाथ अंततः अपराधियों तक पहुंच ही जाते हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर पुलिस (बिधनू थाना) ने एक ऐसे ही अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाते हुए दो इनामी आरोपियों को मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित 'बागेश्वर धाम' से गिरफ्तार किया था।
क्या था पूरा मामला?
पुलिस के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह मामला कानपुर के खरेसा गांव का है। दिनेश अवस्थी (जो पेशे से एक ट्रक ड्राइवर थे) की उनके ही छोटे भाई मनोज और पत्नी पूनम ने मिलकर हत्या कर दी थी। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि दिनेश के काम के सिलसिले में बाहर रहने के दौरान, उसकी पत्नी और छोटे भाई के बीच नजदीकियां बढ़ गई थीं। जब दिनेश को इस बात की भनक लगी और उसने विरोध किया, तो दोनों ने योजनाबद्ध तरीके से उस पर जानलेवा हमला कर दिया और शव को गांव के ही एक तालाब में फेंक कर फरार हो गए।
पहचान बदलकर बागेश्वर धाम में ली शरण:
वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस की नजरों से बचने के लिए दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन पूरी तरह से बंद कर दिए थे। इसके बाद वे मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध 'बागेश्वर धाम' पहुंच गए। पुलिस की पकड़ से बचने के लिए उन्होंने वहां एक ढाबे पर काम करना शुरू किया और साथ ही अपनी असली पहचान छिपाकर आश्रम में सेवादार बनकर रहने लगे। कानपुर पुलिस ने दोनों की गिरफ़्तारी पर 25-25 हजार रुपये का इनाम भी रखा था।
सर्विलांस टीम की एक कामयाबी और खुला राज:
लगभग 8 महीने तक फरारी काटने के बाद, मुख्य आरोपी पूनम ने अपने किसी परिचित से बात करने के लिए जैसे ही अपना पुराना मोबाइल फोन ऑन किया, कानपुर पुलिस की सर्विलांस (Surveillance) टीम का रडार एक्टिव हो गया। पुलिस ने तुरंत लोकेशन ट्रेस की और मध्य प्रदेश पुलिस की मदद से बागेश्वर धाम में छापेमारी कर दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
पूछताछ में आरोपियों के अजीबोगरीब दावे:
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी देवर मनोज ने मामले को भटकाने की कोशिश की और अजीबोगरीब दावा किया कि उसकी भाभी पर 'प्रेत बाधा' (मानसिक समस्या) थी, जिसका इलाज कराने के लिए वे बागेश्वर धाम आए थे। हालांकि, पुलिस की सख्त पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के सामने दोनों ज्यादा देर टिक नहीं सके और अंततः अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने कानूनी कार्रवाई पूरी कर दोनों को जेल भेज दिया है।
(नोट: यह रिपोर्ट पुलिस फाइलों और पूर्व में दर्ज FIR के आधार पर एक क्राइम डायरी का हिस्सा है।)


