
मेडिकल लापरवाही की इंतहा: राइट की जगह निकाली लेफ्ट किडनी, 14 साल बाद पीड़ित परिवार को मिला 2 करोड़ का मुआवजा
नई दिल्ली/अलीगढ़ (द इंडियन न्यूजपेपर ब्यूरो):
जब कोई मरीज अस्पताल जाता है, तो उसे डॉक्टर पर भगवान जैसा भरोसा होता है। लेकिन क्या हो जब इलाज करने वाला ही जानलेवा गलती कर बैठे? उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से 14 साल पहले एक ऐसा ही रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया था, जिस पर अब देश की सबसे बड़ी कंज्यूमर कोर्ट (NCDRC) ने अपना फैसला सुनाते हुए इसे 'मेडिकल डिजास्टर' (इलाज में भीषण गड़बड़ी) करार दिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना साल 2012 की है। अलीगढ़ की रहने वाली 56 वर्षीय एक महिला को पेट में दर्द की शिकायत के बाद आशीर्वाद नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। मेडिकल जांच में पता चला कि उनकी दाहिनी (Right) किडनी में हाइड्रोनेफ्रोसिस (सूजन) की समस्या है। 6 मई 2012 को डॉक्टर राजीव लोचन ने सर्जरी की।
लेकिन ऑपरेशन के बाद जब महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ, तो दूसरे अस्पताल में सिटी स्कैन (CT Scan) कराया गया। रिपोर्ट देखकर सब सन्न रह गए—जिस दाहिनी किडनी में बीमारी थी, वह शरीर में वैसी ही मौजूद थी, और डॉक्टर ने गलती से पूरी तरह स्वस्थ बाईं (Left) किडनी को शरीर से बाहर निकाल दिया था।
दो साल तक तड़पती रही महिला:
इस भयानक मेडिकल लापरवाही के बाद, महिला का शरीर धीरे-धीरे जवाब देने लगा। करीब दो साल तक डायलिसिस और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं (खून में पोटैशियम का स्तर बढ़ना) से जूझने के बाद, आखिरकार महिला ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
डॉक्टर का लाइसेंस हुआ था सस्पेंड:
शिकायत के बाद चीफ मेडिकल ऑफिसर द्वारा बनाई गई मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में डॉक्टर की लापरवाही साबित हुई। इसके बाद यूपी मेडिकल काउंसिल ने कड़ा कदम उठाते हुए डॉक्टर का मेडिकल रजिस्ट्रेशन दो साल के लिए सस्पेंड कर दिया था, जिसे बाद में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी सही ठहराया।
14 साल बाद मिला न्याय:
साल 2014 में पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए NCDRC का दरवाजा खटखटाया। हाल ही में 18 मई को रिटायर्ड जस्टिस ए.पी. साही की बेंच ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने डॉक्टर की उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि गलती से किडनी निकालना संभव नहीं है।
आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, "एक परिवार ने असमय ही अपनी मां और पत्नी को खो दिया, जिसकी भरपाई पैसों से कभी नहीं की जा सकती।" कोर्ट ने डॉक्टर की लापरवाही के लिए पीड़ित परिवार के सदस्यों को कुल मिलाकर करीब 2 करोड़ रुपये का भारी-भरकम मुआवजा देने का आदेश दिया है।


